मांगलिक जाँच
मांगलिक दोष जाँच
अपनी कुंडली में मांगलिक (मंगल) दोष है या नहीं, मुफ़्त जानें। लग्न, चंद्र और शुक्र, तीनों से जाँच, सटीक खगोलीय गणना पर आधारित।
जाँच का आधार
लग्न
चंद्र राशि
शुक्र राशि
मंगल राशि व भाव
विवाह के लिए असली सवाल यह है कि दोनों कुंडलियाँ मिलकर मांगलिक दोष रद्द करती हैं या नहीं, यह सिर्फ़ दोनों की कुंडली साथ देखकर तय होता है।
कुंडली मिलान करें →जन्म विवरण भरें और मांगलिक स्थिति जानें
मांगलिक दोष क्या है?
मांगलिक (मंगल) दोष तब बनता है जब मंगल कुंडली के लग्न, चंद्र या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित हो। यह तीन अलग-अलग बिंदुओं से जाँचा जाता है, इसलिए किसी एक भाव में मंगल होने का मतलब हर बार मांगलिक होना नहीं है।
यह अकेले शुभ या अशुभ होने का प्रमाण नहीं है। पारंपरिक ज्योतिष में कई ऐसी स्थितियाँ हैं जिनमें यह दोष रद्द (cancel) माना जाता है, जैसे जब वर और वधू दोनों मांगलिक हों।
इसलिए विवाह के संदर्भ में मांगलिक स्थिति अकेले नहीं, दोनों कुंडलियों की तुलना करके देखी जानी चाहिए।
सामान्य प्रश्न
मांगलिक दोष से जुड़े सवाल
मांगलिक दोष कैसे तय होता है? +
मंगल की स्थिति लग्न, चंद्र और शुक्र, तीनों से अलग-अलग जाँची जाती है। यदि इनमें से किसी से भी मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो कुंडली मांगलिक मानी जाती है।
क्या मांगलिक होना बुरा है? +
नहीं, यह सिर्फ़ एक ज्योतिषीय तथ्य है, कोई भविष्यवाणी नहीं। कई पारंपरिक नियमों में यह रद्द भी हो जाता है, खासकर जब दोनों साथी मांगलिक हों।
विवाह के लिए दोनों की कुंडली क्यों देखनी चाहिए? +
दोष-निवारण (cancellation) के नियम दोनों कुंडलियों की तुलना पर आधारित हैं। सिर्फ़ एक व्यक्ति का मांगलिक होना पूरी तस्वीर नहीं देता, इसलिए विवाह से पहले पूर्ण कुंडली मिलान ज़रूरी है।
क्या यह जाँच मुफ़्त है? +
हाँ, पूरी तरह मुफ़्त। मांगलिक स्थिति एक बुनियादी ज्योतिषीय तथ्य है। विवाह के लिए दोनों कुंडलियों का पूर्ण मिलान हमारी सशुल्क सेवा है।