राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे से ठीक सामने (7वें घर की दूरी पर) रहते हैं, और दोनों मिलकर हर राशि-जोड़े में लगभग 18 महीने बिताते हैं। यह चाल सूर्य या चंद्रमा जितनी तेज़ नहीं, इसलिए इसका असर लंबे समय तक महसूस होता है।

मौजूदा स्थिति

राहु 19 मई 2025 से कुंभ राशि में हैं, और केतु उसी समय से सिंह राशि में हैं। यह अक्ष 6 दिसंबर 2026 तक बना रहेगा।

अगला बदलाव

6 दिसंबर 2026 को राहु मकर राशि में और केतु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। यह अगला 18 महीने का चक्र होगा।

इसका मतलब क्या है

राहु-केतु का अक्ष बदलने पर सामूहिक स्तर पर विषयों का ज़ोर बदलता माना जाता है, जैसे कुंभ-सिंह अक्ष में तकनीक, समूह और आत्म-अभिव्यक्ति से जुड़े विषय प्रमुख रहते हैं, जबकि मकर-कर्क अक्ष में करियर-ढांचे और घर-परिवार के बीच संतुलन के विषय उभरते हैं। यह सामान्य, सामूहिक स्तर की परंपरागत व्याख्या है, व्यक्तिगत भविष्यवाणी नहीं।

अपनी कुंडली में राहु-केतु की स्थिति

व्यक्तिगत स्तर पर राहु-केतु किस भाव में बैठे हैं, यह कुंडली टूल पर जन्म विवरण डालकर देखा जा सकता है।

यह जानकारी वर्णनात्मक है और भविष्यवाणी नहीं है।