राहु काल भारत में सबसे ज़्यादा रोज़ाना जांचा जाने वाला अशुभ समय-खंड है, यह लगभग हर पंचांग और कैलेंडर में दिखाया जाता है।
राहु काल कैसे तय होता है
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के पूरे दिन को आठ बराबर हिस्सों में बांटा जाता है, और हफ्ते के हर दिन का एक तय हिस्सा राहु काल माना जाता है (जैसे सोमवार को दूसरा हिस्सा, शनिवार को नौवां हिस्सा जैसी गिनती-प्रणाली)। चूंकि यह सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित है, इसका समय हर शहर में अलग होता है और हर दिन थोड़ा खिसकता रहता है।
शहर के हिसाब से अलग क्यों होता है
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय देशांतर, अक्षांश और मौसम के अनुसार बदलता है, इसलिए दिल्ली और मुंबई का राहु काल एक ही दिन अलग-अलग समय पर पड़ सकता है। कोई एक तालिका पूरे भारत के लिए सही नहीं होती।
आज का राहु काल कैसे देखें
मुहूर्त पेज पर अपना शहर चुनें, वहां आज के दिन का राहु काल, यमगण्ड और अभिजित मुहूर्त, तीनों सटीक सूर्योदय-सूर्यास्त गणना के आधार पर दिखते हैं।
क्या टाला जाता है
नई शुरुआत, यात्रा, विवाह या गृह प्रवेश जैसे शुभ काम राहु काल में टाले जाते हैं। रोज़मर्रा के काम जारी रखे जा सकते हैं। राहु काल में क्या न करें पोस्ट में पूरी सूची दी गई है।
यह जानकारी वर्णनात्मक है।