नामकरण संस्कार में बच्चे का पहला औपचारिक नाम रखा जाता है। यह सोलह संस्कारों में से एक है और आमतौर पर जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है, हालांकि कई परिवार सुविधा के अनुसार इसे बाद में भी करते हैं।

दिन की गिनती

ज्यादातर परंपराओं में जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण होता है। कुछ क्षेत्रों में 16वां, 21वां या 27वां दिन भी चुना जाता है। जन्म के दिन को गिनती में शामिल करने का तरीका परिवार-दर-परिवार अलग हो सकता है, इसलिए पंडित या घर के बुज़ुर्गों से यह पहले स्पष्ट कर लेना बेहतर है।

शुभ तिथि और नक्षत्र

शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी और दशमी तिथियां नामकरण के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। बच्चे की जन्म नक्षत्र के आधार पर नाम का पहला अक्षर तय करने की परंपरा भी साथ चलती है; यह नक्षत्र से नामकरण की बुनियादी बातें पोस्ट में विस्तार से समझाया गया है।

अपनी तारीख को दिन के हिसाब से जांचें

तारीख तय करने के बाद, उसी दिन के भीतर राहु काल और अभिजित मुहूर्त अलग-अलग समय पर पड़ते हैं। अपने शहर के लिए सही समय जानने के लिए मुहूर्त पेज पर शहर चुनकर उस दिन का राहु काल और अभिजित मुहूर्त देखें।

अंतिम फैसला परिवार का

यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। बच्चे और मां की सेहत, परिवार की उपलब्धता और पंडित की सलाह को पंचांग जितना ही महत्व दें।