अष्टकूट के आठ कूट में नाड़ी कूट सबसे ज्यादा अंक (8) का होता है, और नाड़ी दोष को सबसे भारी दोष माना जाता है, भले ही बाकी सब कूट अच्छे मिल रहे हों।

नाड़ी दोष कैसे बनता है

जन्म नक्षत्र को तीन नाड़ी में बांटा जाता है: आदि, मध्य और अंत्य। जब वर और वधू, दोनों की नाड़ी एक जैसी हो, तो नाड़ी दोष माना जाता है। इसे पारंपरिक रूप से संतान-सुख और स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है। पूरी अष्टकूट प्रणाली यहां समझाई गई है।

कब यह मायने नहीं रखता

परंपरा में नाड़ी दोष के कई कैंसिलेशन (छूट) के नियम भी मौजूद हैं, जैसे:

  • अगर दोनों की राशि एक हो लेकिन नक्षत्र अलग हों
  • अगर नक्षत्र एक हो लेकिन चरण (पद) अलग हों
  • कुछ खास नक्षत्र-जोड़ों के लिए परंपरागत रूप से छूट मानी गई है

अलग-अलग पंडित और परंपराएं इन छूटों को अलग तरह से लागू करते हैं, इसलिए एक ही जोड़े के लिए राय अलग-अलग स्रोतों में अलग मिल सकती है।

अपनी कुंडली में जांच करें

नाड़ी और बाकी सभी कूट का सटीक विश्लेषण कुंडली मिलान टूल पर जन्म विवरण डालकर देखा जा सकता है, जिसमें दोष कटने की स्थिति भी स्पष्ट दिखाई जाती है।

अंतिम फैसला परिवार का

नाड़ी दोष होने का मतलब सीधे इनकार नहीं। पारिवारिक परंपरा और पंडित की राय को साथ में शामिल करें।