मांगलिक दोष को लेकर सबसे राहत देने वाला नियम यही है: अगर वर और वधू, दोनों की कुंडली मांगलिक हो, तो परंपरा में दोष को परस्पर कटा हुआ मान लिया जाता है।

दोष क्यों कट जाता है

मंगल दोष तब बनता है जब मंगल लग्न, चंद्रमा या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो। यह दोष असल में मंगल की ऊर्जा के प्रभाव से जुड़ा माना जाता है, और परंपरा मानती है कि दोनों पक्षों में यह ऊर्जा बराबर हो, तो असंतुलन खत्म हो जाता है। मांगलिक दोष के पूरे नियम यहां विस्तार से समझाए गए हैं।

क्या हर बार पूरी तरह कट जाता है

नहीं, परंपरा में यह भी देखा जाता है कि मंगल किस भाव में और किस राशि में बैठा है। कुछ पंडित इस स्थिति में भी शांति पूजा या अन्य उपाय सुझाते हैं, खासकर अगर मंगल की स्थिति सामान्य से ज्यादा प्रबल हो। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अलग-अलग परंपराएं अलग राय रखती हैं।

दोनों कुंडलियों की जांच जरूरी

मांगलिक-मांगलिक होने का दावा बिना जांचे नहीं करना चाहिए, क्योंकि मंगल दोष की गणना भाव और राशि, दोनों पर निर्भर करती है। मांगलिक जांच टूल पर दोनों की जन्म-कुंडली से सटीक स्थिति देखें।

अंतिम फैसला परिवार का

यह जानकारी वर्णनात्मक है, विवाह का निर्णय नहीं देती। पंडित की सलाह और परिवार की परंपरा को साथ में शामिल करें।