गंड मूल नक्षत्र में जन्म को लेकर परिवारों में अक्सर चिंता देखी जाती है, पर यह उतना असामान्य नहीं जितना लगता है, क्योंकि 27 में से 6 नक्षत्र इसी श्रेणी में आते हैं।

कौन से नक्षत्र गंड मूल में आते हैं

अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती, ये छह नक्षत्र गंड मूल कहलाते हैं। यानी हर छठे बच्चे के आसपास इसी श्रेणी में जन्म होने की संभावना बनती है। पूरी नक्षत्र सूची यहां देखी जा सकती है।

डर क्यों बना है

परंपरा में माना जाता है कि गंड मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे का असर माता-पिता में से किसी एक पर पड़ सकता है। इसी वजह से “शांति पूजा” कराने का चलन है, ताकि इस असर को परंपरागत रूप से शांत किया जा सके।

चरण के हिसाब से तीव्रता अलग होती है

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, और परंपरा में गंड मूल का असर सभी चरणों में एक जैसा नहीं, कुछ चरणों में ज़्यादा गंभीर माना जाता है, कुछ में हल्का। पूरी कुंडली देखे बिना यह अंतर पता नहीं चलता।

व्यावहारिक सलाह

गंड मूल शांति पूजा एक स्थापित परंपरा है, इसे परिवार की मान्यता और पंडित की सलाह से किया जा सकता है। यह किसी आपातकालीन स्थिति की तरह नहीं है, समय मिलने पर जन्म के कुछ हफ्तों के भीतर की जा सकती है।

अपने बच्चे का नक्षत्र जांचें

कुंडली टूल पर जन्म विवरण डालकर नक्षत्र और चरण, दोनों सटीक देखे जा सकते हैं।

यह जानकारी वर्णनात्मक है और डराने के लिए नहीं है।