अष्टकूट के आठ कूट में भकूट कूट को 7 अंक दिए जाते हैं, यानी नाड़ी के बाद यह दूसरा सबसे भारी कूट है।
भकूट दोष कैसे बनता है
भकूट दोष दोनों की चंद्र राशियों के बीच की दूरी से तय होता है। अगर वर-वधू की राशियां एक-दूसरे से 6-8 या 2-12 की स्थिति में हों, तो भकूट दोष माना जाता है। पूरी अष्टकूट प्रणाली यहां समझाई गई है।
इसे संतान-सुख से क्यों जोड़ा जाता है
परंपरा में भकूट दोष को दांपत्य सुख, आर्थिक स्थिरता और संतान-सुख से जोड़कर देखा जाता है, इसीलिए इसे भारी माना जाता है, भले ही बाकी कूट अच्छे मिल रहे हों।
कैंसिलेशन (छूट) के नियम
- अगर दोनों राशियों के स्वामी ग्रह एक जैसे हों, तो परंपरागत रूप से दोष माफ माना जाता है
- अगर दोनों राशियां एक-दूसरे से मैत्री (मित्रता) संबंध में हों, तो असर हल्का माना जाता है
- नाड़ी दोष की तरह भकूट के लिए भी अलग-अलग परंपराएं अलग छूट के नियम लागू करती हैं
राशि-स्तर की सामान्य अनुकूलता
स्वामी ग्रह की मैत्री और तत्व के आधार पर हर दो राशियों की सामान्य अनुकूलता राशि अनुकूलता गाइड में देखी जा सकती है, यह भकूट की सटीक गणना से अलग एक सामान्य, जल्दी समझ में आने वाला नज़रिया है।
अपनी कुंडली में जांच करें
भकूट सहित सभी आठों कूट का सटीक विश्लेषण कुंडली मिलान टूल पर जन्म विवरण डालकर देखा जा सकता है।
अंतिम फैसला परिवार का
भकूट दोष होने का मतलब सीधे इनकार नहीं। दोष और उनका महत्व पोस्ट में बताई गई पूरी तस्वीर को साथ में देखें।