अन्नप्राशन बच्चे के जीवन में पहली बार ठोस अन्न खिलाने की रस्म है। यह भी सोलह संस्कारों में गिना जाता है और बच्चे के दांत निकलने के आसपास के महीनों में किया जाता है।
उम्र की परंपरा
लड़कों के लिए आमतौर पर छठे महीने में और लड़कियों के लिए पांचवें या सातवें महीने में अन्नप्राशन करने का चलन है। यह परंपरा क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलती है, और बच्चे की सेहत को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
शुभ तिथि और नक्षत्र
शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी और दशमी तिथियां अन्नप्राशन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, स्वाति, अनुराधा और रेवती नक्षत्रों को भी शुभ गिना जाता है। सोमवार, बुधवार और गुरुवार को अच्छे दिन माना जाता है।
अपनी तारीख को दिन के हिसाब से जांचें
तारीख तय करने के बाद, उसी दिन के भीतर राहु काल और अभिजित मुहूर्त अलग-अलग समय पर पड़ते हैं। अपने शहर के लिए सही समय जानने के लिए मुहूर्त पेज पर शहर चुनकर उस दिन का राहु काल और अभिजित मुहूर्त देखें।
अंतिम फैसला परिवार का
यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। बच्चे के डॉक्टर की सलाह और सेहत को पंचांग से पहले रखें; रस्म को बच्चे की तैयारी के हिसाब से आगे-पीछे करना पूरी तरह सामान्य है।